आयौ तीमी हे रुपशी उत्शाह का लहर बनी .................

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आयौ तीमी हे रुपशी उत्शाह का लहर बनी .................

Post  green_desert on Thu Mar 12, 2009 10:06 pm

आयौ तीमी हे रुपशी उत्शाह का लहर बनी
छायाउ तीमी हे रुपशी चारै थरी प्रहर बनी

सुन्मा सुगन्ध थपे झै मन्मा उमंग भरे झै
आयौ तीमी हे रुपशी गजल्को बहर बनी

पथ्बीहीन् यो कीरन भौतारीदै हीडीराथ्यो
आयौ तीमी हे रुपशी मोद्बीहीन डहर बनी

मान्छे को यो कोलाहलमा बाँच्न नसक्ने भाथे म
आयौ तीमी हे रुपशी बेग्लै सुन्दर शहर बनी

पागल भन्थे एक्लो भन्थे यहाँ का भनौदाहर्ले
आयौ तीमी हे रुपशी सब आँखाको रहर बनी

आयौ तीमी हे रुपशी उत्शाह का लहर बनी
छायाउ तीमी हे रुपशी चारै थरी प्रहर बनी
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green_desert

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